शनिवार, 3 अगस्त 2019

15 साल पहले प्रारम्भ हुई थी मटेश्वर धाम कांवर यात्रा : 15वीं वर्षगाँठ पर विशेष


1 अगस्त 2005 को शुरू हुई मटेश्वर धाम कांवर यात्रा धीरे धीरे कारवां बनता गया
कोशी बिहार टुडे, सहरसा


तारीख 1अगस्त 2005 मटेश्वर धाम के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है। इसी दिन मटेश्वर धाम कांठो बलवाहाट में पहली बार 80 किलोमीटर की कष्ट दायक मार्ग होते हुए कांवर यात्रा शुरू हुई। कांवर यात्रा शुरू करने में अहम भूमिका मुन्ना भगत एवं शिवेन्द्र पोद्दार का रहा। जिनके प्रेरित करने पर सिकन्दर साह विनोद साह संजय चौरसिया मंगल साह वीरबल साह ने भी साथ निभाया। मुन्ना भगत ओर शिवेन्द्र पोद्दार  ने मटेश्वर धाम को विकसित एवं अंतरराष्ट्रीय पटल पर लाने के लिए वर्ष 1997 से अबतक अथक प्रयास किया।
जिसके फलस्वरूप बाबा की महिमा से कभी बुढवा मण्ठ के नाम से जानने वाला मन्दिर, बिहार के देवघर (मटेश्वर धाम) के रूप में प्रसिद्ध हुआ। मुन्ना भगत एवं शिवेंद्र पोद्दार के अथक प्रयास से वर्ष 2007 में पुरातत्व विभाग के निदेशक (भारत सरकार) फनीकांत मिश्र मटेश्वरधाम सर्वेक्षण में आये। उन्होंने मुन्ना भगत एवं शिवेन्द्र पोद्दार सहित उनके मित्रों को श्रेय देते हुए कहा कि आप लोग जिस तरह से मेहनत करते हैं, यह एक दिन अवश्य रंग लाएगा। यहाँ वर्ष 2008 में पहली बार विशाल अद्भुत अविस्मरणीय ऐतिहासिक रथयात्रा के साथ रामधुनी महायज्ञ होते हुए 80 कि मी दूर बेगूसराय जिले के छर्रा पट्टी राजधाम मुगेंरघाट से तीन जिला होते हुए  मटेश्वर पहुंचा जिस यात्रा मे बीस हजार से अधिक श्रद्धालुओं शामिल हुए। जिसका नेतृत्व एवं संचालन कर्ता मुन्ना भगत शिवेन्द्र पोद्दार थे। ओर यह सिलसिला लगातार तीन वर्षों 2008,09 एवं 10 तक चलता रहा। वर्ष 2016 और 2017 मे 54 फीट  कॉवर से बाबा मटेश्वर का जलाभिषेक हुआ।

 वर्ष 2018 में 162 फीट के विशाल कांवर जिस पर बारह ज्योतिर्लिंग सहित तेहरवां ज्योतिर्लिंग स्वरूप मटेश्वर धाम स्थित था, ओर विश्व का सबसे बड़ा ओर अद्भुत कांवड़ जिसे मानव द्वारा अपने कंधे पर उठाकर मुंगेर घाट से बाबा मटेश्वर धाम लाकर जलाभिषेक किया गया था। यह गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड मे शामिल हुआ। वर्ष 2010 मे मुन्ना भगत  के अथक प्रयास से मटेश्वर धाम को बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद में रजिस्ट्रेशन करवाया।मन्दिर में जिस तरह श्रद्धालुओं की तादाद दिनों दिन बढ़ रही है ,अभी सावन के सोमवारी पे दो से ढाई लाख भक्त बाबा के जलाभिषेक के लिये आते हैं,उनके लिये जो व्यवस्था है वो नाकाफी है, इसके लिये जिला प्रशासन, न्यास एवं  डाक कांवड़िया संघ सभी को एक साथ मिलकर आगे आना होगा । हालांकि इस बार एसडीओ बीरेन्द्र कुमार के लगातार प्रयास के बाद श्रद्धालु को बेहतर सुबिधा मिल रहा है।

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