मंगलवार, 27 फ़रवरी 2018

एक ऐसा कार्यालय जहा कार्यरत कर्मी अपने पदाधिकारी को भी नही पहचानते
एसडीओ के निरीक्षण से हुआ खुलासा
महेंद्र प्रसाद, सहरसा

प्रखंड मुख्यालय स्थित ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यालय पदास्थापित कर्मी अपने वरीय पदाधिकारी का ना तो नाम जानते है एवं ना ही पहचानते है। पहली बार इस तरह की अजीबोगरीब मामला को देख एसडीओ हतप्रभ हो गया। 
जांच करने पहुचे एसडीओ- ----
एसडीओ सुमन प्रसाद साह लगभग डेढ़ बजे सिमरी बख़्तियारपुर स्थित पुराना अस्पताल के निजी भवन में विगत छह साल से ग्रामीण कार्य विभाग का कार्यालय चलता है। जब एसडीओ जांच करने पहुचे तो एक ट्रेजरी गार्ड मो मश्लेउद्दीन के अलावा दो परिचायक उपस्थित था। 


जब एसडीओ रह गए भौचक-----
एसडीओ सुमन प्रसाद साह ने जब ट्रेजरी गार्ड मो मश्लेउद्दीन से कार्यालय में कार्यरत कर्मी का नाम बताने को कहा तो कार्यपालक अभियंता एवं तीन सहायक अभियंता में एक का नाम एवं 5 कनीय अभियंता में दो का नाम बताया। बताया कई कई महीने में एक दो बार मे आता है जिन कारण नही पहचानते है। कार्यालय का सरकारी काम कार्यपालक अभियंता रजनीकांत चोधरी के आवास पर चलता है। यही कारण है कि ज्यादातर पदाधिकारी को नही पहचानते है। 

कई कर्मी कार्यरत है कार्यालय में-------
सिमरी बख़्तियारपुर स्थित ग्रामीण कार्य विभाग कार्यालय में कार्यपालक अभियंता के एक पद, सहायक अभियंता के 3 पद, कनीय अभियंता के 5, प्रधान सहायक एक, असिस्टेन्ट 3, कैशियर एवं तीन अनुसेवक का पद है। जवकि कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता, कनीय अभियंता का रजिस्टर कार्यपालक अभियंता के आवास पर था। 
दर्जनों कर्मी कई दिन से गायब था---
हाजिरी रजिस्टर में कई दिनों से है बिना सूचना के अनुपस्थित था। वरीय लेखा लिपिक सुरेंद्र कुमार सुमन 20 फरवरी से बिना सूचना गायब था। इसी तरह उच्च वर्गीय लिपिक मो इम्तियाज अहमद दो दिन से गायब था। निम्नवर्गीय लिपिक विनोद कुमार भारती 20 फरवरी से गायब है। मो सब्बीर 24 फरवरी से लगातार गायब है। परिचायक में दिनेश मंडल 12 फरवरी से, अख्तर अली कोष रक्षक 27 से अरविंद राय परिचायक 21 से, मो कौशर आलम दो दिन से, महमूद आलम 2 दिन, नाशीरुद्दीन 20 फरवरी से एवं जगदीश प्रसाद सिंह दो दिन से अनुपस्थित थे। 
क्या कहते है एसडीओ- एसडीओ सुमन प्रसाद साह ने बताया कि अनुमंडल मुख्यालय के ग्रामीण कार्य विभाग कार्य प्रमंडल सिमरी बख़्तियारपुर के इस कार्यालय में एक दर्जन से ज्यादा कर्मी कार्यरत है। लेकिन अपने उच्च पदाधिकारी को पहचानते तक नही है, जो घोर आश्चर्य है। इससे साबित होता है कि ये पदाधिकारी कभी कार्यालय आते ही नही है। सभी का हाजिरी काट दिया गया है। जिलाधिकारी को रिपोर्ट किया जा रहा है। बिना मतलब का ही आफिस का किराया 12 हजार सरकारी कोष से दिया जा रहा है।

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