बुधवार, 24 फ़रवरी 2021

साले की पत्नी के साथ था अवैध संबंध, फिर इस तरह से कर दिया हत्या

 कोशी बिहार टुडे, सहरसा



बख्तियारपुर थाना क्षेत्र के चकभारो पंचायत स्थित खेत के बहियार से शव बरामद

मृतक युवक की पहचान बनमा-ईटहरी प्रखंड के तरहा गांव निवासी पप्पू सादा के रूप में हुई

 बख्तियारपुर थाना क्षेत्र के चकभारो पंचायत स्थित गेहूं लगे खेत के बहियार से बुधवार की सुबह एक 40 वर्षीय युवक का शव पुलिस ने बरामद किया है। मृतक युवक की पहचान बनमा-ईटहरी ओपी क्षेत्र के तरहा मुसहरी निवासी मानिक सादा का पुत्र पप्पू सादा के रूप में हुई है। 

पुलिस मृतक युवक के शव को कब्जे में लेकर पंचनामा तैयार कर पोस्टमार्टम हेतू सहरसा भेज दिया है। सुबह सवेरे बहियार में शव होने की सूचना पर आसपास के लोगों की भीड़ शव देखने को उमड़ पड़ी। मृतक युवक के शरीर पर कई जख्म के निशान पाए गए हैं। संभावना व्यक्त की जा रही है कि युवक की पीट-पीटकर कर हत्या बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए गेहूं लगे खेत में फेंक दिया गया। 



वहीं घटना की जानकारी मिलने पर बनमा-ईटहरी ओपी क्षेत्र के तरहा गांव से मृतक पप्पू सादा की पत्नी तेतरी देवी परिजनों के साथ बख्तियारपुर थाना पहुंच पति के शव की पहचान किया है। मृतक की पत्नी तेतरी देवी ने बताया कि कल पप्पू सादा दैनिक मजदूरी के दौरान ही गांव से निकल गया। उनकी पत्नी ने बताया कि उसके पति अक्सर चकभारो पंचायत के चकला मुसहरी किसी महिला रिस्तेदार से फोन पर बातचीत के साथ साथ कभी कभार आया जाता था।

उन्होंने बताई कि मंगलवार को भी वह चकला मुसहरी चला गया। उन्होंने आशंका व्यक्त किया है कि चकला मुसहरी स्थित उसके महिला रिस्तेदार ने अपने पति व अन्य लोगों के साथ मिलकर अपने घर बुला मारपीट कर हत्या कर दिया है। वहीं बख्तियारपुर थाना पुलिस चकला मुसहरी स्थित रिस्तेदारों के घर छापेमारी करने गई तो सभी लोग घर छोड़ फरार हो गया है। पुलिस संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। 



पप्पू सादा ने किया दो शादी---

बनमा-ईटहरी ओपी क्षेत्र के तरहा निवासी मृतक पप्पू सादा ने पहली पत्नी के मौत बाद दुसरी शादी की थी। पप्पू सादा की पहली शादी अपने गांव से कुछ दुरी पर स्थित परसाहा गांव निवासी बहादुर दास की पुत्री शिखा देवी से किया था। पहली पत्नी से दो पुत्री व तीन पुत्र हुआ। लेकिन पांच साल पहले पहली पत्नी की मौत हो गई। 

पहली पत्नी की मौत उपरांत पप्पू सादा ने दुसरी शादी धमारा मुसहरी निवासी शिबू सादा की पुत्री तेतरी देवी से किया। इस पत्नी से एक एक साल की पुत्री है। हालांकि तेतरी देवी की भी दुसरी शादी है उसके पहले पति सलखुआ थाना क्षेत्र के कोरलाहा गांव निवासी प्रकाश सादा से हुई थी उस पति से दो पुत्र अभी तेतरी देवी के साथ ही पप्पू सादा के द्वारा पालन पोषण कर रहा था।


पहली पत्नी के भाई की पत्नी से अवैध संबंध---

मृतक पप्पू सादा की पहली पत्नी शिखा देवी के फुफेरा भाई की शादी चकला मुसहरी हुआ था। मृतक की पत्नी ने बताया कि फुफेर भाई की पत्नी ने मंगलवार को फोन कर उसे बुला उसकी हत्या पति सहित अन्य लोगों के साथ मिलकर किया है। वहीं बख्तियारपुर थाना पुलिस चकला मुसहरी छापेमारी करने गई तो सभी लोग घर छोड़ फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है

क्या कहते हैं थानाध्यक्ष---

इस पुरे मामले पर बख्तियारपुर थानाध्यक्ष सह इंस्पेक्टर सुधाकर कुमार ने बताया कि प्रथम दृष्टया प्रेम-प्रसंग में हत्या की संभावना जताई जा रही है। मृतक की पत्नी के अनुसार आरोपी की तलाश हेतू छापेमारी की जा रही है जल्द पुरे मामले का खुलासा कर लिया जाएगा।

शनिवार, 20 फ़रवरी 2021

जिनके घर में नही होगा शौचालय, वह नही लड़ सकेंगे चुनाव, ईवीएम के माध्यम से पंचायत चुनाव कराने की तैयारी

 

कोशी बिहार टुडे, सहरसा



पंचायत चुनाव में नया फरमान : मुखिया के घर से कम से कम 100 मीटर दूर होगा मतदान केंद्र

पंचायत चुनाव अप्रैल महीने में होना है। इसको लेकर तैयारी जोराें पर है। पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल जून महीने में खत्म हो रहा है। गत चुनाव से इतर इस बार वैसे ही लोग चुनाव लड़ सकते हैं जिनके घर में शौचालय है। जिनके घर में शौचालय नहीं है तो वह किसी भी पद के लिए योग्य नहीं माने जाएंगे। नामांकन करने पर उनका नामांकन रद्द कर दिया जाएगा। चुनाव आयोग से मिले पत्र को प्रखंडों में भेजा गया है। उधर, इस बार पंचायत चुनाव पहली बार ईवीएम से होने जा रही है।

जिसको लेकर जिला प्रशासन से लेकर उम्मीदवार अपनी-अपनी तैयारी कर रहे हैं। चुनाव लड़ने को इच्छुक उम्मीदवार अपनी तैयारी पर जोरों पर कर रहे हैं। गांव में बैठक से लेकर वर्तमान प्रतिनिधि के कामकाज का लेखा-जोखा भी पेश कर उसमें खामी निकालने का प्रयास कर रहे हैं ताकि खुद को उससे बेहतर पेश कर सकें। उधर, विभाग इस बार मुखिया के घर से कम से कम सौ मीटर की दूरी पर मतदान केंद्र बनाएगी। ताकि मुखिया वोट को प्रभावित नहीं कर सके।

मुखिया किसी हाल में मतदान को प्रभावित नहीं करेंगे

चुनाव के दौरान वर्तमान मुखिया के घर से कम से कम 100 मीटर की दूरी पर मतदान केंद्र बनाया जाएगा। ताकि किसी भी स्थिति में मुखिया मतदान को प्रभावित नहीं कर सके। गत चुनाव के दौरान इस तरह की शिकायत सामने आई थी।

महिलाओं के जारी रहेगा 50 प्रतिशत आरक्षण | गत चुनाव की तरह ही इस बार भी महिलाओं के लिए 50 प्रतिशित आरक्षण का स्लैब जारी रहेगा। आरक्षण मोड में कोई बदलाव नहीं है।

बढ़ाई जा सकती है खर्च की सीमा | पंचायत चुनाव में इस बार खर्च की सीमा बढ़ सकती है। अभी के अनुसार वार्ड सदस्य व पंच पद के प्रत्याशियों को अधिकतम 20 हजार रुपए खर्च करना है। इनपुट-दैनिकभास्कर

शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2021

इतने बच्चे वाले ही लड़ सकते है पंचयात चुनाव, पंचायती राज विभाग ने कर दिया स्पष्ट

कोशी बिहार टुडे, सहरसा



बिहार में मार्च से के अप्रैल बीच संभावित पंचायत चुनाव में उतरने का मन बना रहे संभावित उम्मीदवारों के लिए राहत की खबर है। पंचायत चुनाव लड़ने में उनके बच्चों की संख्या उनके लिए बाधा नहीं बनेगी, यानी बिहार में पंचायत चुनाव में टू चाइल्ड पॉलिसी सरकार नहीं लाने जाने जा रही है। इससे पहले यह आशंका जताई जा रही थी कि नगर निकाय चुनाव की तरह ही सरकार पंचायत चुनाव में भी मुखिया और सरपंच के पदों के लिए दो बच्चों से अधिक वालों को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य करार दे सकती है, लेकिन अब पंचायती राज विभाग ने इन आशंकाओं को सिरे से खारिज कर दिया है।

पंचायती राज अधिनियम में नहीं होगा कोई बदलाव

पंचायत चुनाव को लेकर मीडिया के सवालों का जबाब देते हुए पंचायती राज विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृतलाल मीणा ने कहा कि 'पंचायती राज अधिनियम में बदलाव करने का कोई प्रस्ताव नहीं है,और मौजूदा अधिनियम पर ही चुनाव कराया जाएगा। इसलिए प्रत्याशी भ्रम में ना आएं। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव की तैयारी आयोग स्तर पर चल रहीं है और इस बार पंचायच चुनाव पूर्व के चुनाव की तुलना में कम चरणों में होंगे।

फरवरी के अंत तक चुनाव तिथि का हो सकता है ऐलान

राज्य निर्वाचन आयोग और पंचायती राज विभाग जोर-शोर से पंचायत चुनाव की तैयारियों में लगा है। इन तैयारियों को देखते हुए यह माना जा रहा है कि फरवरी के अंत तक बिहार में पंचायत चुनाव की तिथियों का ऐलान हो सकता है। पंचायती राज विभाग पंचायत चुनाव से जुड़ी विभिन्न तैयारियों को अंतिम रूप में देने में लगा है। EVM खरीद का प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट भेजा जाने वाला है, क्योंकि इस बार त्रिस्तरीय पंचायती राज चुनाव EVM से होना है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बिहार में पहली बार EVM से हो रहे पंचायत चुनाव पर करीब 450 करोड़ का खर्च आएगा, जिसमें 125 करोड़ की लागत से पंचायत चुनाव के लिए मल्टीपोस्ट EVM खरीदी जाएंगी। इनपुट-दैनिकभास्कर

बुधवार, 3 फ़रवरी 2021

बिहार पंचायत चुनाव: 3 साल से जमे अफसर बदले जाएंगे, BDO, CO और SDM का भी होगा तबादला

अब मुखिया को मिलेगा ये सम्बल, चुनाव आयोग ने मुखिया के लिए 29 सिंबल अलॉट किया गया

कोशी बिहार टुडे, सहरसा



इस साल मार्च से अप्रैल के बीच संभावित पंचायत चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग एक्शन मोड में आ चुका है। निर्वाचन आयोग ने विभिन्न विभागों को पत्र लिखकर ऐसे BDO, CO और SDM को हटाने के लिए कहा है, जो बीते तीन साल से एक ही जगह पदस्थापित हैं। इसके साथ ही आयोग ने उन अधिकारियों को भी हटाने का फरमान जारी किया है, जो दागी या अपने काम में लापरवाह रहे हैं।

कई विभागों को भेजा पत्र

राज्य निर्वाचन आयोग ने ग्रामीण विकास विभाग,राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के साथ सामान्य प्रशासन विभाग को पत्र लिखा। निर्वाचन आयोग की तरफ से भेजे गए इस पत्र में तीन साल से एक ही जगह पर पदस्थापित पदाधिकारियों को वर्तमान नियुक्ति स्थल से हटाने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही इस पत्र में उन पदाधिकारियों की जानकारी भी विभाग से मांगी गई है, जिन पर पंचायत चुनाव में गड़बड़ी करने या काम ठीक से नहीं करने के आरोप पहले से रहे हैं।

मतदाता सूची में गडबड़ी तो BDO होंगे जिम्मेवार

बिहार पंचायत चुनाव के लिए तैयार हो रहे मतदाता सूची में गड़बड़ी की शिकायतों को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने सख्ती दिखाई है। आयोग ने निर्देश दिया है कि अंतिम सूची प्रकाशित करते समय सभी BDO को यह लिखित प्रमाण देना होगा कि प्रकाशित मतदाता सूची सही है। सुधार के बाद 19 फरवरी को मतदाता सूची का प्रकाशन होगा। उस फाइनल मतदाता सूची के प्रकाशन के समय सभी बीडीओ को यह लिखकर देना होगा कि प्रकाशित मतदाता सूची सही है और विधानसभा की मतदाता सूची में दर्ज सभी नाम पंचायत की सूची में भी शामिल हैं।

विभिन्न पदों के लिए सिंबल हुए तय

पंचायत चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने मुखिया पद से लेकर वार्ड सदस्यों के लिए सिंबल निर्धारित कर दिया है। मुखिया के लिए कुल 29 सिंबल को अलॉट किया गया है। वहीं, वार्ड सदस्यों के प्रत्याशियों के लिए पांच सिंबल निर्धारित है। मुखिया पद के लिए मोतियों की माला, ब्लैक बोर्ड, कलम और दवात, ईंट, पुल, बैगन, ब्रश, कैमरा, चिमनी, मोमबत्तियां, कार, गाजर, जग, टेलीविजन, टोकरी, बल्ला, केतली व कैरम बोर्ड जैसे कुल सिंबल अलॉट किये गए हैं। वार्ड सदस्यों के पद के लिए वायुयान, अलमारी, कुल्हाड़ी, गुब्बारा व केला चिन्ह को निर्धारित किया गया है। बाइक, नल, जीप, टमटम, छाता, टेलीफोन, ट्रक, पानी का जहाज, चरखा व तलवार जैसे सिंबल ग्राम कचहरी के लिए हैं, तो कचहरी के पंच गुड़िया, चापाकल, कुर्सी, टार्च और ट्रैक्टर के सिर्फ पांच सिंबल पर चुनाव लड़ेंगे। पंचायत समिति के लिए कुल 10 सिंबल अलॉट हैं। पंचायत समिति के प्रत्याशी को छत का पंखा, नारियल, कंघा, चारपाई, कप और प्लेट, डोली, फ्राक, फ्राइंग पैन, गैस सिलिंडर और बिजली है। इनपुट-दैनिकभास्कर

शनिवार, 30 जनवरी 2021

बिहार की पंचायतों की बल्ले बल्ले: चुनाव के पहले हर पंचायत के हिस्से में 10.45 लाख आएंगे

चुनाव के समय आयी राशि से पंचायत प्रतिनिधि करा पाएंगे अधूरा कार्य

कोशी बिहार टुडे, सहरसा



बिहार की त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं को वित्तीय वर्ष 2020-21 में 15वें वित्त आयोग के अनुदान के तहत 1254.50 करोड़ की राशि जल्द ही मिलनेवाली है। केंद्र सरकार की तरफ से मिलनेवाली यह राशि अनुदान की दूसरी किस्त है। केंद्र सरकार की तरफ से 2509 करोड़ की राशि पहले ही भेजी जा चुकी है। दूसरी किस्त के अक्टूबर-नवंबर तक आने की संभावना थी, लेकिन अब 2 महीने की देर हो गई है। दूसरी किस्त आने के बाद भी अनुशंसा के मुताबिक मिलने वाली 1255 करोड़ की राशि नहीं मिल पाई है। 15वें वित्त आयोग की अनुशंसा पर बिहार के पंचायती राज संस्थाओं को कुल 5018 करोड़ की राशि मिलनी है।

हर पंचायत को मिलेंगे 10.45 लाख

पंचायती राज संस्थाओं को मिली इस दूसरी किस्त में करीब 70 फीसदी राशि ग्राम पंचायतों को, 20 फीसदी पंचायत समितियों को और 10 फीसदी जिला परिषद् को मिलेगी। इस तरह से 1254.50 करोड़ की इस राशि में से 878 करोड़ ग्राम पंचायतों को, 250 करोड़ पंचायत समितियों को और 125 करोड़ जिला परिषद् को आवंटित किया जाएगा। बिहार में करीब 8400 ग्राम पंचायत हैं। इस तरह दूसरी किस्त में हर पंचायत को लगभग 10 लाख 45 हजार की राशि मिलेगी। हालांकि पंचायतों को यह राशि उनकी आबादी और क्षेत्र के आकार के हिसाब से तय होगी। इस तरह दो पंचायतों को मिलने वाली राशि में अंतर भी होगा।

हर पंचायत को मिलने थे औसतन 41 लाख

15वें वित्त आयोग के तहत त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं को 5018 करोड़ रुपए मिलने हैं। इनमें ग्राम पंचायतों को 70 प्रतिशत हिस्सा यानि करीब 3500 करोड़ मिलेंगे। राज्य में ग्राम पंचायतों की संख्या 8386 है। इस हिसाब से राज्य के हर पंचायत को वर्तमान वित्तीय वर्ष में औसतन 41 लाख रुपए मिलना है। केंद्र सरकार ने 2509 करोड़ की राशि पहले किस्त में विमुक्त की थी। पहली किस्त से बिहार के हर पंचायत को औसतन 20 लाख रूपये मिले थे। इस तरह दोनों किस्तों को मिलाकर हर पंचायत को औसतन 31 लाख की राशि आवंटित कर दी गई है।

2 महीने देर से आई है राशि

पंचायती राज संस्थाओं को मिलनेवाली राशि की दूसरी किस्त के अक्टूबर-नवंबर तक आने की संभावना थी, लेकिन अब 2 महीने की देरी हो गई है। जानकारों की मानें तो पंचायती राज संस्थाओं की राशि 2 किस्तों में आती रही है। इसबार दूसरी किस्त आने के बाद भी वित्त आयोग की अनुशंसा के मुताबिक मिलने वाली 1255 करोड़ की राशि नहीं मिल पाई है। वित्तीय वर्ष 2020-21 को खत्म होने में लगभग 60 दिन बचे हैं। ऐसे में बाकी 1255 करोड़ की राशि को लेकर संशय बना हुआ है। 1255 करोड़ की इस राशि से बिहार के हर पंचायत को करीब 10 लाख और मिल पाएगा। इनपुट-दैनिकभास्कर

शुक्रवार, 29 जनवरी 2021

जो कार्य एक वर्ष पहले 7 लाख 95 हजार में होता था, वही कार्य के लिये दूसरे वर्ष कर दिया 14 लाख 28 हजार, सड़क एवं गली की तो सफाई नही हुई, लेकिन खजाना जरूर हो रहा है साफ

 जो कार्य वर्ष 18-19 में सा़फ-सफाई व डोर - टू - डोर कचरा प्रबंधन का लागत था 7 लाख 95 हजार

पुनः वर्ष 19 - 20 में इसी कार्य का 14 लाख 28 हजार खर्च कर रही नपं प्रशासन

कोशी बिहार टुडे, सहरसा



नगर पंचायत सिमरी बख्तियारपुर में नगर की साफ़ - सफाई व डोर - टू - डोर कचरा प्रबंधन के नाम पर सरकारी राशि की बर्बादी की चर्चा चहुंओर हो रही है। वर्ष 2018  में जो कार्य 7 लाख 95 हजार रुपए किया जाता था, उसी कार्य को अगले वर्ष 14 लाख 28 हजार रुपए में किया जाने लगा। आश्चर्य फिर भी यह है कि सफाई के नाम काम सिर्फ मुख्य सड़कों की ही सफाई हो रही है और इतनी राशि खर्च करने के बाबजूद नगर पंचायत की सूरत किसी से छुपी नहीं है। जिसका खामियाजा हर वर्ष केंद्र सरकार द्वारा किये जाने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण में देखने को मिलता है। बीते वर्ष भी नगर पंचायत की स्थिति स्वच्छता सर्वेक्षण में 104 वां स्थान से उपर नहीं उठ सका था। 

 क्या है पुरा मामला 

प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर पंचायत सिमरी बख्तियारपुर क्षेत्र के 15 वार्डों में साफ़ - सफाई व इतने ही वार्डों के घरों से डोर - टू - डोर कचरा का संग्रह कर उसे कचरा डंपिंग यार्ड में पहुंचाने का टेंडर सुपौल जिले के गढ़ बरूआरी के एनजीओ राठौड़ एण्ड विश्वजीत इन्फ्रा डेवलपर्स लिमिटेड को वर्ष 18 -19 में 7 लाख 95 हजार रुपए में नपं प्रशासन द्वारा वैद्य चयन प्रक्रिया के तहत किया गया। पुनः नगर प्रशासन ने उपरोक्त कार्य अगले वर्ष के लिए आमंत्रण पत्र जारी किया। सबसे बड़ी बात है कि पुनः उसी एनजीओ को दुबारा कार्य मिलता है और राशि जो उस एनजीओ के हाथ अलग - अलग एकरारनामें के साथ एक कार्य साफ - सफाई की राशि 7 लाख 98 हजार 707 रूपए कर दूसरे कार्य डोर - टू - डोर कचरा उठाव को 6 लाख 30 हजार रुपए कर शर्तों के साथ तीन साल का एकरार कर दिया गया। नपंवासियो ने बताया कि ऐसी एनजीओ जिसका सफाई के प्रति हमेशा लापरवाही सामने आती रही। उस एनजीओ को कैसे तीन साल के लिए नगर सफाई का दायित्व दे दिया गया। यह एक जांच विषय है। आश्चर्यजनक यह भी है कि सात लाख के काम को चौदह लाख में करवाने से क्या सरकारी राशि की बर्बादी का मामला प्रतीत नही हो रहा है। 

नही मिलती कोई सुविधा



सिमरी बख्तियारपुर नगर पंचायत में कार्यरत सफाई कर्मी को भी बीते कई वर्षों से सुविधा के नाम पर सबकुछ शून्य ही मिला है। एकरारनामा के अनुसार सफाई के लिए चयनित एनजीओ को सफाईकर्मी को सुरक्षा सामाग्री तथा हैंड ग्लब्स, जूता, ड्रेस, रेडियम पट्टी युक्त सुरक्षा टोपी देना अनिवार्य था, लेकिन बीते कई वर्षों से सफाईकर्मी को यह सुविधा नही दिया जाना एनजीओ के लापरवाही पूर्ण रवैये को दर्शाता है। इसके अलावे चनयित एनजीओ राठौड़ एंड विश्वजीत इंफ्रा डेवलपर्स को एक स्थायी प्रतिनिधि रखनी थी, लेकिन एकरारनामे के कई वर्ष बाद भी स्थायी प्रतिनिधि आमजनों के बीच उपलब्ध नही है। 

क्या कहते हैं नगर कार्यपालक पदाधिकारी--

नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी कमलेश कुमार प्रसाद ने बताया कि बोर्ड के निर्णय के अनुसार सशक्त स्थायी समिति के निर्णय के मुताबिक जो भी समीक्षा की गई उसके अनुरूप यह तय हुआ है। पिछले बार वाली एजेंसी खाद नही बना रही थी।

वहीं इस बाबत नगर अध्यक्ष प्रतिनिधि मो मोजाहिद आलम ने बताया कि पहले सिर्फ एनजीओ कचरा उठाव करती थी। परंतु वर्तमान में कचरा उठा कर उसे खाद बनाया जा रहा है। 

गुरुवार, 28 जनवरी 2021

कोशी इलाके में अब होगी मोती की खेती, सिमरीबख्तियारपुर से होगी शुरुआत, सासंद ने बताया बेहतर

कोशी बिहार टुडे, सहरसा



अगर आप को लगता है कि अच्छी कमाई नहीं हो रही है तो मोती की खेती में हाथ आजमाना चाहिए। यह खेती करीब 2 लाख रुपये के निवेश से शुरू हो सकती है और बाद में आपको हर माह औसतन 1 लाख रुपये महीने की कमाई करा सकती है। आजक मोती की मांग घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मार्केट में काफी है। 

बिहार के समस्तीपुर जिले के दलसिंहसराय के बुलाकिपुर गांव में प्रणव कुमार खुद कई सालों से मोती की खेती कर रहा है। वही अपने यहां लड़को को भी ट्रेनिंग दे रहा है। मोती की खेती की जानकारी मिलने पर सासंद चौधरी महबूब अली केसर ने प्रणव को अपने आवास पर बुलाकर सारी जानकारी लिया। वही सासंद श्री कैसर ने बताया की कम लागत में ये एक अच्छा कारोबार है। जहाँ इनकी मांग बाजार में ज्यादा है वही बेरोजगार युवक खुद रोजगार कर अच्छा पैसा कमा सकता है। अब बहुत जल्दी ही सिमरी बख्तियारपुर इनकी ट्रेनिंग कुछ लोगो को दिया जाएगा। ये ट्रेनिंग प्रणव कुमार के पर्ल फाउंडेशन देगा। 



कैसे होती है मोती की खेती--

मोती की खेती शुरू करने के लिए खेती की जमीन की जगह छोटे से तालाब की जरूरत पड़ती है। इसी तालाब में सीप के माध्यम से मोती की खेती की जाती है, जो बाद में अच्छी कमाई कराती है। इस तालाब में मोती ऐसे तैयार होते हैं, या खुद छोटे से छोटे पानी टंकी बनाकर मोती की खेती कर सकते है।

ऐसे होती है मोती की खेती

मोती की खेती शुरू करने के लिए करीब 500 वर्गफीट के एक तालाब की जरूरत होती है। इस तालाब में 100 सीप डालकर मोती की खेती शुरू की जा सकती है।  सीप की बाजार में कीमत करीब 15 रुपये से लेकर 25 रुपये तक होती है। वहीं ताबाल में स्ट्रक्चर सेटअप पर करीब 10000 रुपये से 12000 रुपये तक का खर्च आता है। इसके अलावा वाटर ट्रीटमेंट पर भाी करीब 1000 रुपये और 1000 रुपये के उपकरण भी लेने होते हैं।



कैसे होती है कमाई--

जब सीप तालाब में डाला जाता है तो इसमें से 15 से लेकर  20 महीने के बाद सीप से मोती मिलता है। इस मोती की बाजार में कीमत 300 रुपये से लेकर 1500 रुपये तक होती है। वहीं अगर आपका तैयार किया गया मोती अच्छी गुणवत्त का है तो इस डिजाइनर मोती के लिए आपको अंतरराष्ट्रीय बाजार में 10 हजार रुपये का दाम भी मिल सकता है। ऐसे में अगर एक मोती से औसतन 1000 रुपये मिल जाता है तो कुल मिलाकर 1 लाख रुपये तक की कमाई आसानी से हो सकती है। सीप की संख्या को बढ़ाकर आप चाहें तो अपनी कमाई भी बढ़ा सकते हैं।

सीप में डालना होता है बीज

मोती की खेती थोड़ा वैज्ञानिक खेती है। इसलिए इसे शुरू करने से पहले आपको प्रशिक्षण की जरूरत पड़ेगी। यह ट्रेनिंग भारत सरकार की तरफ से कराई जाती है। इस ट्रेनिंग के बाद आपको सीप की व्यवस्था करनी होगी। यह सीप आप सरकारी संस्थानों से या मछुआरों से ले सकते हैं।

कैसे करें सीप को तैयार



सबसे पहले इन सीप को खुले पानी में डालना पड़ता है। फिर 2 से 3 दिन बाद इन्हें निकाला जाता है। ऐसा करने से सीप के ऊपर का कवच और उसकी मांसपेशियां नरम हो जाती हैं। लेकिन इन सीप को ज्यादा देर तक पानी से बाहर नहीं रखना चाहिए। जैसे ही सीपों की मांशपेशियां नरम हो जाएं इनमें मामूली सर्जरी के माध्यम से सिप के अंदर सामग्री डाली जाती है, तब मोती बनता है। 


सामग्री के चलते निकलने लगता है पदार्थ

जब इस तरह से सीप में कोई सामग्री डाला जाता है, तो सीप में चुभन होती है। इसके चलत सीप अपने अंदर से निकलने वाला पदार्थ छोड़ना शुरू कर देता है। अब 2 से 3 सीप को एक नायलॉन के बैग में रखकर तालाब में बांस या किसी पाईप के सहारे छोड़ा जाता है। बाद में इस सीप से 15 से 20 महीने के बाद मोती तैयार हो जाता है। अब कवच को तोड़कर मोती निकाला जाता है।

सरकार से ले सकते हैं फ्री में ट्रेनिंग-

इंडियर काउंसिल फॉर एग्रीकल्चर रिसर्च के तहत एक नया विंग बनाया गया है। इस विंग का नाम सीफा यानि सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेश वॉटर एक्वाकल्चर है। यह फ्री में मोती की खेती की ट्रेनिंग देती है। इसका मुख्यालय उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर में है। यहां पर कोई भी 15 दिनों की ट्रेनिंग ले सकता है। अगर कृषि विभाग चाहे तो आत्मा के माध्यम से किसानों को ट्रेनिंग मिल सकती है। चूंकि आत्मा ट्रेनिंग देने वाली ही संस्था है। लेकिन शायद ही आत्मा इस मोती की खेती में किसानों को ट्रेनिंग दिलाने में दिलचस्पी ले। 

आसानी से बिक जाता है मोती

मोती को बेचना भी काफी आसान है। इनके बाजार देश के कई राज्यों में हैं। अगर आप चाहें तो हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई जैसे शहरों में सीधे भी अपने मोती बेच सकते हैं। इन शहरों में हजारों कारोबारी हैं, जो मोती का के व्यवसाय में लगे हुए हैं। वैसे कई बड़ी कंपनियां भी हैं जो देशभर में अपने एजेंटों के माध्यमों से इन मोतियों को खरीदती हैं। आप चाहें तो इन कंपनियों से भी संपर्क में रह सकते हैं। अगर आपको इंटरनेट की समझ है तो आप ऑनलाइन भी अपने मोती बेच सकते हैं।

अगर आप भी मोती की खेती करने के लिये ट्रेनिंग लेना चाहते है तो समस्तीपुर के दलसिंहसराय में पर्ल फॉउंडेशन के प्रणव कुमार जिनका मोबाइल नंबर एवं व्हाट्सएप 9540146646 पर सम्पर्क कर ट्रेनिंग ले सकते है। 

जनआस्था, युवाओं की तपस्या और जनसहयोग से बनी बाबा मटेश्वर धाम श्रावणी मेले की पहचान

  बाबा मटेश्वर धाम श्रावणी मेला की 21साल संघर्ष से शिखर तक:  आज लाखों कांवरियों की आस्था का केंद्र है बाबा मटेश्वर धाम, लेकिन इसकी शुरुआत कु...