सोमवार, 6 मई 2019

सहरसा से गंगजला होते कारू ख़िरहरी तक जाएगी रेलवे की नई लाइन


रेलवे बोर्ड ने दिया मंजूरी, दशकों से अतिक्रमण वालो पर चलेगा बुलडोजर
कोशी बिहार टुडे, सहरसा

सहरसा में गंगजला चौक होकर सिंगल रेललाइन गुजारने के लिए रेलवे बोर्ड ने मंजूरी दे दी है। दो किमी की दूरी में रेललाइन गुजारने के लिए सहरसा स्टेशन पास से कारू खिरहरि हाल्ट के बीच रेलवे की जमीन खाली कराई जाएगी।

रेललाइन निर्माण वाले मार्ग में रेलवे की जमीन पर कब्जा जमाए करीब 300 पक्के और कच्चे मकान और दुकानों को हटाकर अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। रेल एडीईएन मनोज कुमार ने कहा कि वर्षों पहले पुरानी रेललाइन गंगजला चौक स्थित बस स्टैंड के पीछे मलीन बस्ती होकर कारू ख़िरहरी हाल्ट तक जाती थी। उस मार्ग में ही फिर से लाइन बिछाने का निर्णय इंजन रिवर्सल में लगने वाले आधे घंटे समय की बचत और कटिहार रूट की ट्रेनों को सहरसा होकर गुजारने को लेकर मंडल रेल प्रबंधक ने लिया है।

अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस भेजना शुरू---
मंडल रेल प्रबंधक के द्वारा रेललाइन निर्माण के लिए भेजे गए प्रस्ताव को रेलवे बोर्ड ने मंजूरी दे दी है। वरीय अधिकारियों के निर्देश पर अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस भेजना 4 मई से शुरू कर दिया गया है। अतिक्रमण हटा लेने की समय अवधि एक माह दी गई है। अगर एक माह में खुद से अतिक्रमण नहीं हटाए तो जिला प्रशासन के सहयोग से प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी और पुलिस बलों की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी को उजाड़ना रेलवे का मकसद नहीं है, रेल यात्रियों की सुविधा के लिए पूर्व की तरह से रेललाइन गंगजला चौक होकर गुजारी जाएगी। रेललाइन का निर्माण कंस्ट्रक्शन विभाग करेगा।
सहरसा में लंबी दूरी की कई बढ़ जाएगी ट्रेनें---
शहर के बस स्टैंड के पीछे होकर गंगजला चौक, पंचवटी चौक, तिरंगा चौक, इस्लामिया चौक होकर कारु खिरहरि हाल्ट तक रेललाइन गुजारने से इंजन रिवर्सल की समस्या दूर हो जाएगी। इंजन रिवर्सल में लगने वाला आधा घंटा समय बचेगा। राजधानी सहित अन्य लंबी दूरी की ट्रेनों के कटिहार से सहरसा होकर चलने का रास्ता साफ हो जाएगा। सहरसा में लंबी दूरी की ट्रेनों की संख्या बढ़ जाएगी।

120 फीट चौड़ी होगी रेललाइन---
दो किमी लंबी और 120 फीट चौड़ी यह रेललाइन होगी। शहर होकर गुजरने वाली यह तीसरी रेललाइन हो जाएगी। शहर के तिरंगा चौक पर वाहनों के आर-पार करने के लिए सब वे बनाया जाएगा। कारू ख़िरहरी हाल्ट के पास रैम्प का निर्माण होगा।
इस संबंध में एडीईएन मनोज कुमार ने कहा कि पूर्व की तरह गंगजला चौक होकर रेललाइन गुजारने के लिए भेजे गए प्रस्ताव को रेलवे बोर्ड से मंजूरी मिल गई है। वरीय अधिकारियों के निर्देश पर अतिक्रमणकारियों को नोटिस भेजकर एक माह में खुद से खाली कर देने के लिए कहा जा रहा है। वहीं समस्तीपुर मंडल के आरपीएफ कमांडेंट आंशुमान त्रिपाठी ने कहा कि रेलवे की जमीन को अतिक्रमणमुक्त कराया जाएगा।
आभार-हिंदुस्तान

रविवार, 5 मई 2019

रमजान में गलत संगत से दूर रहे, मिलता है अल्लाह का रहमत

मंगलवार से शुरू होगा रोजा, एक महीने तक चलेगा
कोशी बिहार टुडे, सहरसा

रमजान के महीने को इबादत का महीना कहा जाता है। इस दौरान बंदगी करने वाले हर शख्स की ख्वाहिश अल्लाह पूरी करता है।रमजान का अर्थ है जलना यानी रोजा रख ने से सारे गुनाह जल जाता है। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक नवां महीना रमजान का होता है। इसमें सभी मुस्लिम समुदाय के लोग एक महीना रोजा रखते हैं।
मुस्लिम समुदाय में रमजान को इसलिए भी खास माना जाता है, क्योंकि इसी दौरान इस्लामिक पैगम्बर मोहम्मद के सामने कुरान की पहली झलक पेश की गई थी। लिहाजा रमजान को कुरान के जश्न का भी मौका माना जाता है।
रमजान एक अरेबिक शब्द है। ये अरेबिक के रमीदा और रमद शब्द से मिलकर बना है। इसका मतलब चिलचिलाती गर्मी और सूखापन होता है।
रमजान के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग पूरे एक महीने व्रत(रोजा) रखते हैं। इस्लाम में रोजा को फर्ध(ईश्वर के प्रति अपनी कृतज्ञता जाहिर करना) माना गया है। इस दौरान कुछ लोगों जैसे बीमार होना, यात्रा करने,गर्भावस्था में होने,मासिक धर्म से पीड़ित होने एवं बुजुर्ग होने पर इन्हें रोजा न रखने की छूट होती है।
रोजे के दौरान रोजेदार पूरे दिन बिना कुछ खाए पिए रहते हैं। हर दिन सुबह सूरज उगने से पहले थोड़ा खाना खाया जाता है। इसे सुहूर (सेहरी)कहते हैं, जबकि शाम ढलने पर रोजेदार जो खाना खाते हैं उसे इफ्तार कहते हैं।
रमजान के दौरान खास दुआएं पढ़ी जाती हैं। हर दुआ का समय अलग अलग होता है। दिन की सबसे पहली नमाज को फज्र कहते हैं। जबकि रात की खास नमाज को तारावीह कहते हैं तराविह की हर सजदा पर 20000 सवाब मिलता है।
रमजान के दौरान रोजेदारों को बुरी सौहबतों से दूर रहना चाहिए, उन्हें न तो झूठ बोलना चाहिए, न पीठ पीछे किसी की बुराई करनी चाहिए, और ना ही लड़ाई झगड़ा करना चाहिए। इस्लामिक पैगंबरों के मुताबिक ऐसा करने से अल्लाह की रहमत मिलती हे
रमजान के दौरान पूरे महीने कुरान पढ़ना चाहिए। पैगंबरों के मुताबिक कुरान को इस्लाम के पांच स्तम्भों में से एक माना गया है। रोजे के वक्त कुरान पढ़ने से खुदा बंदों के गुनाह माफ करते हैं और उनके लिए जन्नत का दरवाजा खोलते हैं।
रमजान के वक्त रोजेदारों को दरियादिली दिखानी चाहिए, उन्हें दान(जकात) देना चाहिए। इससे उन्हें सबाब(पुण्य) मिलेगा। कई लोग इस दौरान मस्जिदों में मुफ्त में लोगों को खाना खिलाते हैं। जबकि कई लोग जरूरतमंदों को जरूरी सामान भी बांटते हैं।
आमतौर पर शिया और सुन्नी दोनों ही रमजान एक जैसे ही मनाते हैं, लेकिन दोनों के तरीकों में थोड़ा फर्क होता है। मसलन सुन्नी समुदाय के लोग अपना रोजा सूरज छिपने पर खोलते हैं। वहीं शिया पूरी तरह से अंधेरा होने के बाद रोजा खोलते हैं।
माना जाता है कि रमजान के गर्मियों में पड़ने पर ये काफी खास होता है। आफताब(सूरज) की गर्मी में रोजेदारों के पाप जल जाते हैं। मन पवित्र हो जाता है और दिल से बुरे विचार खत्म हो जाते हैं।
रमजान महीना ईद-अल-फित्र से खत्म होता है। इसे शवाल(चंद्र मास) का पहला दिन भी कहते हैं। इस दिन सभी रोजेदार नए कपड़े पहनकर मस्जिदों और ईदगाह में जाते हैं। वहां वे रमजान का आखिरी नमाज पढ़कर खुदा का शुक्रिया अदा करते हैं, साथ ही एक दूसरे को गले मिलकर बधाई देते हैं।

हाफीज मोहम्मद मुमताज रहमानी
इमामी जामा मस्जिद रानीबाग अध्यक्ष तनजीम अ इम्मा ए मसाजीद सहरसा

अच्छी पहल: गरीब, लाचार मुश्लिम के बीच रमजान खाद्यान पैकेट वितरित


गुजरात के ईसा फाउंडेशन की तरफ से शिविर लगाकर किया गया वितरण
कोशी बिहार टुडे, सहरसा

 गरीब, लाचार, अपंग, विधवा एवं यतीम को रोजा में किसी तरह की परेशानी नहीं हो और अफ्तार व सेहरी के बिना रोजा नहीं रहना पड़े इसके लिए ईसा फाउंडेशन जामिया फैजानुल कुरान अहमदाबाद गुजरात के सौजन्य से सिमरी बख्तियार पुर अनुमंडल स्तर पर "रमजान खाद्यान्न पैकेट का वितरण किया गया।
 फिदा ऐ मिल्लत ट्रस्ट मोबारकपूर के द्वारा  कार्यक्रम आयोजित किया गया । जिसमें मिल्लत ट्रस्ट के संरक्षक मौलाना महबूब उर रहमान कासमी ईसा फाउंडेशन गुजरात का परिचय कराते हुए कहा कि यह फाउंडेशन पुरे देश में जाति धर्म से ऊपर उठ कर शिक्षा, स्वास्थ्य,  और सामाजिक सहायतार्थ काम करती है। साथ ही ऐसी गरीब लड़कियों की सामूहिक शादी भी कराती है जिन लडकियों के मां बाप गरीबी के कारण दहेज नहीं दे पाते हैं। इसी फाउंडेशन के द्वारा सिमरी बख्तियार पुर में विगत मार्च में 60 लडकियों का विवाह संपन्न हुआ था और भविष्य में बिहार में 600 लडकियों की शादी कराने का ईसा फाउंडेशन ने फैसला लिया है।

आज के समारोह में सिमरी बख्तियार पुर अनुमंडल के तीनों प्रखंडों सिमरी बख्तियार पुर, सलखुआ और बनमा ईटहरी प्रखंड के दर्जनों गांवों के सैकड़ों लोगों के बीच रमजान कीट का वितरण किया गया। आगामी रमजान को देखते हुए वितरण कार्यक्रम जल्द से जल्द संपन्न हो इसके लिए अनुमंडल स्तर पर 5 वितरण केन्द्र बनाया गया है। इस रमजान पैकेट में 15 किलोग्राम चावल एवं 15 किलोग्राम आंटा, 5 लीटर सरसों तेल, दाल, बेसन, शर्बत, चाय चीनी, खजूर, मसाला से लेकर नमक तक शामिल है। इस अवसर पर मौलाना अंजर आलम मिफताही, हाफिज जिया उददीन नदवी, हाफिज शकील अहमद,  वजीह अहमद तसौवुर, अनवर आलम, अबु नसर, अब्दुल बासित, मेहदी हसन, मशीर आलम, अंजर इमाम, अबु सईद आदि उपस्थित थे।

शनिवार, 4 मई 2019

अभिभावक-शिक्षक गोष्टी में पहुचे अभिभावक ने विद्यालय में कुव्यस्था को लेकर किया हंगामा


शिक्षण व्यवस्था ठप रहने का अभिभावक ने लगाया आरोप
कोशी बिहार टुडे, सहरसा

प्रखंड के मध्य विद्यालय बदिया बलहमपुर में कुव्यवस्था को लेकर शनिवार को बच्चों संग अभिभावकों ने हंगामा कर विरोध जताया।
विरोध कर रहे ग्रामीणों ने कहा कि विद्यालय में शिक्षण कार्य नियमित व सही ढंग से नहीं चलता है। शिक्षक विद्यालय आते है लेकिन सही से पढ़ाते नही है।
वहीं ग्रामीणों का आरोप था कि  कि विद्यालय में चलाए जा रहे एमडीएम में गुणवत्ता का ख्याल नहीं रखा जाता है। खिचड़ी में दाल का पता नहीं रहता है। हरी सब्जी नाममात्र का दिया जाता है। मशाला भी नाम मात्र का दिया जाता है। शुक्रवार को अंडा के बदले अंगूर दिया जाता है वह भी कम मात्रा में।
इस संबंध में हेडमास्टर  सुनैना देवी देवी ने बताई कि शनिवार को विद्यालय में बच्चे कम आने को लेकर अभिभावकों की बैठक बुलाई गई थी। बैठक में कुछ अभिभावकों ने आप्ति जताया था। चुंकि बच्चे कम आते हैं, इसी को लेकर बैठक बुलाया गया था। एमडीएम मीनू के अनुसार दिया जाता है। अंडा के बदले मौसमी फल दिया जाता है। 
बताते चलें कि इस विद्यालय में कुल नामांकित बच्चे की संख्या 475 है जिसमें कुल नौ शिक्षक कार्यरत हैं। हालांकि सभी शिक्षक उपस्थित थे

14 वर्ष के नाबालिग ने मांगा इच्छा मृत्यु, कहा पिता ने मां के लिए सब कुछ किया, पर मां की आंख में पानी नहीं


पिता को है कैंसर, माँ बन गयी है बाप-बेटे के जान के दुश्मन
कहलगांव के मनोज मित्रा के बेटे कृष राज ने प्रधानमंत्री से लेकर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को लिखी चिट्ठी।
कोशी बिहार टुडे, सहरसा

मैं खुद की जिंदगी से तंग आ गया हूं। मुझ भी शौक था कि मैं आम बच्चों की तरह जीयूं, पढूं। बचपन का आनंद ले सकूं। लेकिन महज 14 साल की उम्र में जिंदगी के हर दुख को झेल लिया। अब कैंसर से पीड़ित पिता को मरते नहीं देखना चाहता हूं। इससे पहले मैं खुद मरना चाहता हूं। घुट-घुटकर कर जी रहा हूं।
बस पापा को मरते नहीं देखना चाहता, क्योंकि मां का प्यार कभी मिला ही नहीं। मां के होते अनाथ की तरह मां के लिए तड़पा हूं। जन्म देकर महज चार माह की उम्र में आगे पढ़ने व खुद की तरक्की के लिए मां ने मुझे दादा-दादी के घर भेज दिया। मां को पिता ने खूब पढ़ाया, काबिल बनाया। खून-पसीना बहाकर खूब कमाया। भूखे-प्यासे रहकर पिता ने मशीन की तरह काम किया। लेकिन 14 साल के बाद जब मां की नौकरी 2011 में बैंक में पीओ पद पर लग गई तो खुशी हुई कि अब सब कुछ ठीक हो जाएगा। लेकिन इसके बाद भी वह प्यार देने के बजाय नफरत करने लगी।
यातना देने लगी...। अब अगर मेरे साथ कुछ होता है या मैं आत्महत्या करता हूं तो इसकी जिम्मेदार केवल मेरी मां होगी। उसके कारण मेरा जीना बहुत मुश्किल हो गया है। मैं जहां भी जाता हूं वहां आकर वह मुझे और मेरे पापा को परेशान करती हैं। घर, स्कूल, दोस्तों के बीच, पापा के ऑफिस...हर जगह पहुंचकर बदसलूकी करती हैं। मुझसे यह सब बर्दाश्त नहीं होता है। अब मैं अपनी इच्छा से मरना चाहता हूं...मुझे इच्छा मृत्यु चाहिए...।
आयोग ने डीएम से जांच कर मांगी रिपोर्ट
यह चिट्ठी कहलगांव एनटीपीसी निवासी मनोज कुमार मित्रा के 14 वर्षीय नाबालिग बेटे कृषराज मित्रा ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को लिखी है। प्रधानमंत्री, बिहार व झारखंड के मुख्यमंत्री को भी इसकी प्रति भेजी है। आयोग ने इस पर संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी को कहा है कि पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट आयोग को भेजी जाए। आयोग ने कुछ जरूरी दस्तावेज भी मांगे हैं। इनमें नाबालिग का उम्र प्रमाण पत्र, नाबालिग की वर्तमान स्थिति, पुलिस की ओर से इस मामले में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। नाबालिग को परामर्श सेवा मुहैया करने के लिए भी कहा है।
 आयोग ने कहा, बच्चे को डर है कि संपत्ति के लिए मां जान से मरवा सकती है
आयोग के वरिष्ठ परामर्शदाता रमण कुमार गौड़ की ओर से डीएम को पत्र भेजा गया है। इसमें कहा गया है कि 27 मार्च, 2019 को दिल्ली महिला आयोग की ओर से प्राप्त शिकायत पर बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम व किशोर न्याय अधिनियम के तहत इसपर संज्ञान लिया गया है।
मनोज कुमार मित्रा का 14 वर्षीय नाबालिग बेटा कृषराज मित्रा कहलगांव के एनटीपीसी पीटीएस बी-73 में रहता है। 18 मई, 2017 को बच्चे को उसकी मां सुजाता कुमारी ने बहुत पीटा और चाकू से उसके पिता के हाथ व छाती काट दिए। मां उसके स्कूल में आकर उल्टा-सीधा बोलती है, जिससे नाबालिग के सहपाठी उसका मजाक उड़ाते हैं व ताना देते हैं। इससे उसकी पढ़ाई खराब हो गई।
बच्चे के पिता को कैंसर है और प्रतिदिन बच्चे की मां उसका और उसके घरवालों को मानसिक व शारीरिक यातनाएं दे रही हैं। इससे बच्चे के पिता की तबियत और खराब हो रही है। नाबालिग ने परेशान होकर इच्छा मृत्यु की मांग की है। बच्चे को डर है कि पिता की संपत्ति के लिए उसकी मां और उसे व घरवालों को जान से मरवा सकती है।
साभार- दैनिकभास्कर

गुरुवार, 2 मई 2019

नाम आदर्श स्टेशन, पानी के लिये एक चापाकल तक नही

सहरसा के बाद सबसे ज्यादा राजस्व देने वाला सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन के साथ रेलवे करता है भेदभाव
कोशी बिहार टुडे, सहरसा

सिमरी बख्तियारपुर आदर्श स्टेशन को घोषित तो कर दिया, लेकिन सुबिधा के नाम पर आज भी रेलवे ने झुनझुना ही दिया है। राजस्व के मामले में सहरसा के बाद सबसे ज्यादा देता है, लेकिन आज भी यात्री को पीने के लिये पानी तक उपलब्ध नही है। 
मात्र दो चापाकल है स्टेशन पर---
सिमरी बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन पर मात्र दो चापाकल प्लेटफार्म नंबर 1 पर है। प्लेटफार्म नंबर 2 पर एक भी चापाकल नही है। एक नंबर प्लेटफार्म पर जो चापाकल लगा है उससे शुद्ध पीने का पानी नही है। इस भीषण गर्मी में यात्री को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पर रह है। वही दो नंबर प्लेटफॉर्म पर तो एक भी चापाकल नही है। बिजली गुल होने के बाद प्लेटफार्म नंबर 2 अंधकार में डूब जाता है एव असामाजिक तत्वों का बेमतलब जमावड़ा लगा रहता है। जिस कारण रेलवे के पदाधिकारी को खासे परेसानी का सामना करना पड़ता है। बिजली गुल होने के बाद दो नंबर प्लेटफार्म पर जाने के लिये यात्री खासकर महिला डरी रहती है, एव जाने से हिचकती है। 
जलमीनार योजना हो गया हवा-हवाई---
सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन पर जलमीनार बनाने की योजना थी। इनके लिये प्लेटफार्म नंबर एक के उत्तर तरफ मुसाफिर खाना के छत पर जलमीनार बनाने के कार्य भी प्रारम्भ हुआ। पानी टंकी बैठाने के लिये 8 से 10 पॉइंट भी बना, ये बनना लगभग एक साल से ज्यादा हो गया। उसके बाद जो संवेदक गया तो आज तक वापस नही आया। जिन कारण सिमरी बख्तियारपुर प्लेटफार्म नंबर एक एव दो पर पीने के शुद्ध पानी सप्लाई योजना धरा का धरा ही राह गया। 

विश्रामालय में नही है ठहरने की अच्छी व्यबस्था---
सिमरी बख्तियारपुर में एक मात्र विश्रामालय की स्थिति इतनी बुरी है कि आप सोचने पर मजबूर हो जायेगे। एक पलंग है लेकिन चादर नही है, शौचालय की स्थिति बदतर है। प्रथम श्रेणी प्रतीक्षालय में एक कुर्सी तक नही है। जिन कारण यात्रिओ को कठिनाई का सामना करना पड़ता है। रेलवे कर्मचारी के लिये शौचालय तक नही है। जिन कारण इन कर्मचारियों को काफी दिक्कतें होती है। 
पूछताछ काउंटर तो बना लेकिन चालू नही हुआ---
सिमरी बख्तियारपुर में पूछताछ काउंटर बनकर तैयार है। लेकिन उक्त काउंटर का गेट बुकिंग की ही गेट से प्रवेश है। चूंकि बुकिंग से गेट से आना जाना सुरक्षा मापदंड में ठीक नही है, इस कारण बुकिंग कर्मचारी ने पूछताछ के लिये अलग गेट देने को कहा। अलग गेट नही होने के कारण पूछताछ काउंटर चालू नही हो सका।
विदयालय के दीवाल पर उकेरी ट्रैन की तश्वीर, लोग कर रहा है प्रशंसा
जब लोग स्कूल के पास से गुजरता है तो देखने को जरूर मजबूर हो जाता है।
कोशी बिहार टुडे, सहरसा

सहरसा जिला के प्लस टू उच्च विद्यालय सिमरी बख्तियारपुर के दीवाल पर ट्रेन का पेंटिंग बना विदयालय की चर्चा जोड़ो पर है। हर कोई इस पेंटिंग की तारीफ कर रहा है, दूर से देखने पर लगता है कोई ट्रैन खड़ी है। आने-जाने वाले हर कोई लोग देखता है तो कहता है कि अति सुंदर।
नाम रखा सफलता एक्सप्रेस---
इस शानदार ट्रैन की पेंटिंग का ख्याल विदयालय के प्राचार्य डॉ जाकिर हुसैन के दिमाग मे आया। उसके बाद विदयालय के रंगाई-पुताई किया गया एव शानदार ट्रैन का पेंटिंग स्कूल के दीवाल पर उकेर दिया। अगर दूर से देखने पर अकस्मात लगता है प्लेटफॉर्म पर कोई ट्रैन खड़ी है। इतना ही नही पूरे विदयालय के परिसर को प्राचार्य डॉ जाकिर हुसैन ने गार्डन में तब्दील कर दिया है। विदयालय परिसर में एक से बढ़कर एक फूल, सहित कई मेडिसिनल प्लांट लगाया गया है। स्कूल को सुंदर बनाने में खुद प्राचार्य अपने जेब से  खर्च किया। आज विदयालय की प्रसंसा चारो ओर किया जा रहा है।
कोसी आयुक्त ने किया था प्रशंसा---
कोसी प्रमंडलीय आयुक्त आसागम्बा चूआ आओ एव डीआईजी सुरेश कुमार चौधरी 20 अप्रैल को सिमरी बख्तियारपुर लोकसभा चुनाव को लेकर निरीक्षण करने सिमरी बख्तियारपुर पहुचे थे। इसी  क्रम में उच्च विद्यालय सिमरी बख्तियारपुर पहुचे एव विदयालय में लगे एक से बढ़कर फूल एव दीवाल पर सफलता एक्सप्रेस ट्रैन का पेंटिंग देख प्राचार्य डॉ जाकिर हुसैन का प्रसंसा किया था। 

जनआस्था, युवाओं की तपस्या और जनसहयोग से बनी बाबा मटेश्वर धाम श्रावणी मेले की पहचान

  बाबा मटेश्वर धाम श्रावणी मेला की 21साल संघर्ष से शिखर तक:  आज लाखों कांवरियों की आस्था का केंद्र है बाबा मटेश्वर धाम, लेकिन इसकी शुरुआत कु...